Farmers Protest Breaking News {Bharat Band } 1988 में किसानों का आंदोलन

Farmers Protest {Bharat Band } 1988 में किसानों का आंदोलन

क्या आप लोगों को पता है कि सन 1988 के दौर में  भी इसी प्रकार से किसानों का आंदोलन देखने को मिला था उस वक्त किसी प्रकार का कोई भी संचार का साधन नहीं था उस वक्त ना तो दिल्ली में कोई मेट्रो थी ना ही कोई मोबाइल फोन थे आज की तरह जितनी सुविधा है उस वक्त इतनी सुविधाएं नहीं थी फिर भी बहुत राज्यों से किसानों ने आंदोलन किया था सन 1988 में  Farmers Protest किया था |

सन 1988 में  दिल्ली की सरकार हिल गई थी |

Farmers Protest {Bharat Band }
Farmers Protest {Bharat Band } 1988 में किसानों का आंदोलन

Farmers Protest 1988-

किसानों को लेकर हर साल कोई न कोई ऐसी बड़ी परेशानी आ जाती है और केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ देश में लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिलता है |

आप लोगों को अच्छी तरीके से पता है कि कुछ दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर बहुत किसान आंदोलन कर रहे हैं, और कृषि के लिए कई कानून ऐसे लगाए गए हैं जो कि किसानों को सही नहीं लगते उन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, किसान लगभग 12 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर इकट्ठे हो रहे हैं और वहां पर डेरा जमा कर बैठे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं,

जो किसान वहां पर इकट्ठे हुए है, हालांकि यह पहली बार नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है कि पहले कभी भी इस प्रकार से कोई किसान रोड पर आए हो, पहले भी कई बार किसानों ने इसी प्रकार से आंदोलन किया है और सरकार को हार माननी पड़ी है क्योंकि किसान ही ऐसे लोग हैं जिनकी वजह से पूरा देश खाता है पीता है और बाहर के देशों के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती |

क्योंकि हमारे देश में किसान  बहुत कुछ अपने खेतों में होगा लेते हैं,

अब बात करते हैं कि सन 1988 में अभी बहुत किसानों ने इसी प्रकार से आंदोलन किया था हालांकि उस वक्त कोई भी संचार का साधन नहीं था ,वर्तमान की तरह ऐसी कोई भी सुविधा नहीं थी सन 1988 में फिर भी कई राज्यों के किसानों ने Farmer Protest  किया था,

हालांकि आज से 32 साल पहले भी किसानों का एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला था. इस आंदोलन में किसान अपनी मांगों को मनवाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे दिल्ली से पहली बार किसानों की ताकत देश में देखने को मिली थी. उस दौरान किसानों ने दिल्ली के बोट क्लब. पर कब्जा कर लिया था.

1988 में हुए किसान आंदोलन के कारण पूरी दिल्ली  एक जगह  रुक, यहीं पर लाखों किसान इसी प्रकार से आंदोलन कर रहे थे मरने मारने को तैयार हो गए थे, अब की तरह पहले ऐसे कोई साधन नहीं थे जिनके द्वारा पूरे देश के राज्यों से किसान आ सके लेकिन सन 1988 में फार्मर प्रोटेस्ट में भाग लेने के लिए बहुत राज्यों के किसान अपनी बैल गाड़ियों रेल बस ऐसे  साधनों के द्वारा आए थे और फार्मर प्रोटेस्ट में भाग लिया था |

किसानों की बाढ़-Farmers Protest

दिल्ली बोट क्लब पर लाखों की संख्या में सन 1988 में किसान इकट्ठे हुए थे. इस दौरान दिल्ली में किसानों की बाढ़ आ गई थी वहां पर लाखों की संख्या में किसान इकट्ठे हुए थे 25 अक्टूबर 1988 के दिन राजधानी दिल्ली के बोट क्लब में करीब सात लाख से ज्यादा किसान इकट्ठे हुए थे वहां पर इकट्ठे हुए थे कि वहां की कोई भी जनता नहीं दिखाई दे रही थी चारों तरफ बस किसान दिखाई दे रहे थे.

वहां पर इतने किसानों के खट्टे होने से ऐसा लग रहा था कि दिल्ली एक जगह थम गई है ऐसा लग रहा था मानो कि दिल्ली में अब कोई भी कार्य नहीं होगा तब भारतीय किसान यूनियन ने नेता महेंद्र सिंह टिकैत के कहे शब्द आज भी किसानों की यादों में ताजा है- टिकैत ने क्लब में कहा था- खबरदार इंडिया वालों.

दिल्ली में भारत आ गया है, जैसे ही टिकैत ने भी लाइन कहीं मानो दिल्ली में किसानों का झूठ का झुंड टूट पड़ा

सिक्योरिटी लगाई गई थी पोक सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी और पूरी दिल्ली किसानों से भरी पड़ी हुई थी |

क्योंकि वहां पर चारों तरफ सिर्फ किसानों के साथ दिखाई दे रहे थे |

 किसानों की मांग -Farmers Protest

उस वक्त भी किसानों की बहुत सी मांगे थे उस वक्त प्रधानमंत्री के पद पर राजीव गांधी थे, बोट क्लब पर किसान अपनी मांगों को मंगवाने के लिए इकट्ठा होते जा रहे थे उस दौरान भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के आगे अपनी कुछ मांगे रखी जिनको मनवाने के लिए किसान वहां पर इकट्ठे हुए थे उस वक्त किसानों की मांग थी कि-  गन्ने का ज्यादा समर्थन मूल्य मिले और दूसरी मांग थी कि बिजली पानी फ्री मिले किस प्रकार से किसानों ने अपनी मांगे रखी थी,

अधिक किसान इकट्ठे होने के कारण जो जो किसान की मांगी थी वह मांगे पूरी करनी पड़ी |

इस आर्टिकल के माध्यम से सिर्फ यही बताया जा रहा है कि जिस प्रकार से वर्तमान में जो किसान इकट्ठे हो रहे हैं यहां इकट्ठा होना पहली बार नहीं हुआ है बल्कि इससे पहले भी कई बार इसी प्रकार से किसान अपनी मांगों को लेकर एकजुट बनाकर इकट्ठे हुए हैं |

Farmers Protest-भारत बंद कर रखी किसानों ने अपनी बातें और बहुत राजनैतिक दल किसानों के साथ

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